(1)- गुरु+रा=चंडाल दोष

गुरु+रा=चंडाल दोष

जब गुरु और राहु किसी भाव मे संयुक्त होते है, तो गुरु चंडाल दोष लगता हैं,

चंडाल दोष और उनके प्रभाव
  • 1-जिस भाव मे लगता है , उसको प्रभावित करता है,
  • 2-जातक को मानसिक चिंता लगी रहती हैं,
  • 3-कैरियर मे बहुत ज्यादा अवसर नहीं मिलता हैं,
  • 4-तरक्की के लिए संघषँ जारी रहता हैं,
  • 5-मंगल कार्य परिवार मे नहीं होता हैं,
  • 6-विवाह में विलंबता होती हैं,

(2)-चं+श.=बिष दोष

चं+श.=के युक्ति से विष दोष कहते है,

विष दोष और उसके प्रभाव
  • 1-जातक को माता पिता का प्रेम नही मिलता हैं,
  • 2-जातक को blood cancer हो सकता हैं,
  • 3-जातक आपने जिवन से निराश रहता हैं,
  • 4-धन धान्य और कैरियर मे विकास नहीं होता हैं,
  • 5-पदोन्नति समय-समय पर नहीं होता है,

(3)- मं.+रा=आंगकारक दोष

मं+रा.=के मेल से आंगकारक दोष लगता हैं।

आंगकारक दोष और उसके प्रभाव
  • 1-जातक के आत्मविश्वास को कमजोर कर देता हैं।
  • 2-भाई बहनों मे द्बेष पैदा करता है।
  • 3-स्वास्थ्य मे पेट से जुड़ी हुई समस्या को उत्पन्न करता है।
  • 4-धर्मपत्नी से रिश्ता को कमजोर कर देता है।

(4) ग्रहण दोष :-जब कुंडली में सूर्य और राहु की युक्ति होती है तो ग्रहण दोष लगती है ।

ग्रहण दोष और इसके प्रभाव :-
  • 1:-इसमे जातक के पिता और पुत्र में अनबन रहता है।
  • 2:-जातक को आँख से जुड़ी समस्या रहती है ।
  • 3:-जातक के बाल जल्दी झड़ जाते है ।
  • 4:-पराक्रम में निरंतरता नही रहती है ।
  • 5:-बचपन से ही जीवन सण्घर्पूर्ण रहता है ।

(5) पितृ दोष :-जब कुंडली में सूर्य और शनि की युक्ति होती है तो पितृ दोष लगता है या सूर्य पर शनि की दृष्टि पड़ने से भी पितृ दोष लगता है ।

पितृ दोष और इसके प्रभाव :-
  • 1:-जातक के पिता से आपसी तालमेल सही नही रहता है ।
  • 2:-जातक स्वलम्बी तथा संघर्षपूर्ण जीवन जीता है ।
  • 3:-जातक अपने पूरे जीवनकाल में परिवारिक कलह से परेशान रहता है ।
  • 4:-शारीरिक पीड़ा हमेशा बना रहता है ।
  • 5:-पराक्रम में विकास की गति धीमी रहती है ।